[नई दिल्ली, द जागरण न्यूज ब्यूरो]: चिकित्सा जगत से जुड़ी एक ऐसी चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जो किसी भी मरीज और उसके परिवार के होश उड़ा देगी. डॉ. मेघवाल के मुताबिक, अस्पतालों और नर्सिंग होम में आज सबसे बड़ी चिंता ये है कि जहाँ 20-50 रुपये की सस्ती दवा से किसी मरीज का काम चल सकता है, वहाँ मुनाफा कमाने के चक्कर में सीधे बड़े ऑपरेशन किए जा रहे हैं.
आयुष्मान योजना: गरीबों के लिए वरदान या अस्पतालों के लिए खजाना?
डॉ. मेघवाल ने 'द जागरण न्यूज' से विशेष बातचीत में खुलासा किया कि सरकार की आयुष्मान भारत योजना अस्पतालों के लिए कमाई का जरिया बन गई है. योजना में OPD का खर्च (जैसे 500 रुपये फीस, 2-3 हजार की दवा, 1-2 हजार के टेस्ट) कवर नहीं होता. ये मरीज को अपनी जेब से देना पड़ता है.
दूसरी ओर, आयुष्मान योजना में 50 हजार, 2 लाख, यहाँ तक कि 5 लाख रुपये तक के बड़े ऑपरेशन कवर होते हैं. अस्पतालों और नर्सिंग होम को ऑपरेशन में ज्यादा फायदा दिखता है, क्योंकि सरकार से उन्हें बड़ी रकम मिलती है. उनका दावा है कि इस लालच की वजह से अस्पतालों में ऑपरेशन की संख्या 80% तक बढ़ गई है.
कमीशन का खेल: महंगी दवाएं और जबरन टेस्ट
डॉ. मेघवाल ने बताया कि जेनरिक दवा लिखने में डॉक्टर और मेडिकल स्टोर दोनों को कोई कमीशन नहीं मिलता, इसलिए जानबूझकर महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखी जाती हैं. इस खेल में डॉक्टर का कमीशन 50% तक और सोनोग्राफी व अन्य टेस्ट में 60% तक बताया गया है.
एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है. डॉ. मेघवाल के अनुसार, अगर डॉक्टर सिर्फ 20 रुपये की सस्ती दवा लिखे तो मरीज 500 रुपये की डॉक्टर की फीस को justified नहीं मानेगा. इसलिए डॉक्टर 2-3 हजार रुपये की महंगी दवाएं लिखते हैं, जिसमें से उन्हें 1,500 रुपये तक का 'लिफाफा' (कमीशन) मिलता है.
हद तो तब हो जाती है जब मरीज अगर डॉक्टर के बताए सेंटर से टेस्ट नहीं कराता, तो डॉक्टर रिपोर्ट रिजेक्ट कर दोबारा टेस्ट करवाने पर मजबूर करते हैं, ताकि उनके कमीशन का रेट खराब न हो.
मरीज के परिवार पर जोखिम और जिम्मेदारी
जब बात ऑपरेशन की आती है, तो अस्पताल और डॉक्टर पूरा जोखिम मरीज के परिवार पर डाल देते हैं. ऑपरेशन से पहले उनसे साइन करा लिया जाता है, जिससे उनकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है.
अवेयरनेस प्रोग्राम: हर चीज को क्रॉस-चेक करें
डॉ. मेघवाल ने कहा कि ये सिर्फ करंट अफेयर्स की खबर नहीं है, बल्कि ये आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा अवेयरनेस प्रोग्राम है. उन्होंने जनता से अपील की कि वे स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाते समय सतर्क रहें और हर चीज को क्रॉस-चेक करें.
मुख्य बातें (हाइलाइट्स):
बड़ी चिंता: जहाँ 20-50 रुपये की दवा से काम चल सकता है, वहाँ मुनाफे के लिए सीधे ऑपरेशन किया जा रहा है.
OPD बनाम ऑपरेशन: आयुष्मान भारत में OPD का खर्च कवर नहीं होता, जबकि 5 लाख तक के बड़े ऑपरेशन कवर होते हैं, जिससे अस्पताल ऑपरेशन को बढ़ावा दे रहे हैं.
ऑपरेशन में वृद्धि: इस वजह से अस्पतालों में ऑपरेशन 80% तक बढ़ गए हैं.
जेनरिक बनाम ब्रांडेड: जेनरिक दवा में कमीशन नहीं मिलता, इसलिए डॉक्टर महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं.
भारी कमीशन: डॉक्टर का कमीशन 50% तक, सोनोग्राफी और टेस्ट में 60% तक बताया गया. 2-3 हजार की दवा लिखने पर डॉक्टर को 1,500 रुपये तक 'लिफाफा' मिलता है.
टेस्ट सिंडिकेट: अपने सेंटर से टेस्ट न कराने पर रिपोर्ट रिजेक्ट कर दोबारा टेस्ट करवाने का दबाव बनाया जाता है.
जोखिम पर हस्ताक्षर: ऑपरेशन का पूरा जोखिम मरीज के परिवार पर डाला जाता है और उनसे साइन करा लिया जाता है.
जनता से अपील: डॉ. मेघवाल ने इसे अवेयरनेस प्रोग्राम बताते हुए हर चीज को क्रॉस-चेक करने की सलाह दी.